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Tuesday, February 23, 2016

एहसास - एक राही का सफ़र


इक दिल हो जो मेरा हो
इक दर्द मुहब्बत जैसा हो
इक ख्वाब तुम्हारे जैसा हो 

दिल के आईने में यादों की बारिश हो 
हर आवाज तुम्हारी हो,
हर तस्वीर तुम्हारे जैसी हो

जब थामू मैं हाथ कोई, 
फिर से आँखे बंद करके
वो अहसास तुम्हारे जैसा हो
बस यूँ लगे कि क़ोई हो, 
तो तुम्हारे जैसा हो

जब "तेरे सामने होने सी"
दौलत दूर मुझसे जाये
नम शोहरत मेरी आँखों से 
ख्वाबों की तरह गिर जाये

और मेरा पागल दिल पैमानों में 
मुस्कराहट भर के इक गीत नया सा गाये
और हर लव्ज तुम्हारे जैसा हो 
हर बात तुम्हारे जैसी हो

और कलम लिखे मेरी
इक दिल हो, जो मेरा हो 
इक दर्द मुहब्बत जैसा हो 
इक ख्वाब तुम्हारे जैसा हो
इक हम-कदम तुम्हारे जैसा हो 
इक मंजिल तुम्हारे जैसी हो 

   -रोशन कुमार "राही"

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Thursday, February 18, 2016

कागज और स्याही

उस बंद किताब ने फिर बुलाया है 
उस सूखे गुलाब ने फिर पुकारा है 
उन ग़ज़लों और उस स्याही 
ने हमें फिर पुकारा है 
इस दिल की तबाही ने हमें 
फिर पुकारा है 

कोरे कागज ने कहा है स्याही से, 
फिर से मुहब्बत हो गयी है तुमसे 
स्याही कहती है 
कितना बेरंग अक्स तुम्हारा है 
तुम जैसे कइयों ने मुझे पुकारा है 

जरा सा दिल में तो पनाह दो 
कोई आग दिल में फिर से तुम लगा दो 
मुहब्बत न करो, बस ख्वाब दिखा दो 

हम वो है जिसके वजूद को 
मंजिल तुमने दी है 
आज भी रोता हूँ 
कि हम वो कागज है 
जिसके सीने पर, इक जालिम ने 
कलम छोड़ दी है 

उन सुखी पत्तियों ने जो 
जख्म लिखे है, मेरे दामन पे 
उन महकती बहारों ने मुझे 
फिर से पुकारा है 

हम तो कागज है, उस मुकाम के 
ऐ "राही" ऐ "साहिल" ऐ स्याही 
जहा सिर्फ तू ही इमान हमारा है 

उस बंद किताब ने फिर बुलाया है 
उस सूखे गुलाब ने फिर पुकारा है 

Written by -
-रोशन कुमार "राहीं  & भावेश

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अमरप्रेम

तेरी याद में वो राह मेरी,
 पीछे छूट गयी 
इस दिल की आह इक,
 पीछे छूट गयी
तेरी मुस्कुराहट को याद कर के  
वो मुस्कुराहट मेरी, पीछे छूट गयी

मय  में हर कोई कहता है 
अपनी-अपनी कहानी 
तुझे देखा तो वो कहानी मेरी 
पीछे छूट गयी

डूबते सूरज को देखा तो 
ये ख्याल आया 
वो सपनों की रानी मेरी 
पीछे छूट गयी

वो मुस्कुराते थे  देखकर मुझको 
सितम ढाने के इरादे से 
वक़्त गुजर गया है "शायद"
और बात पीछे छूट गयी 

दीवाने मरते थे मेरी दीवानगी देखकर 
और अब ये राह मुझसे पूछती है
क्या वो उम्र पीछे छूट गयी ??


जो दिल धड़क रहा है तुम्हारा 
ऐ "राही" ऐ "साहिल" 
तो समझना की मुहब्बत 
आज भी है मुझे, उससे 
की होश खोकर फिर आएंगे , तेरा होने को 
उन गलियों की दहलीज़ों पर 
जहां मुहब्बत की वो बात 
और वो ईक मुलाकात 
मेरे अधूरे इजहार की बात 
अधूरी - पीछे छूट गयी

Written by -
-रोशन कुमार "राहीं  & भावेश 



 

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